मैने अपने सिवा किसी को बर्बाद नही किया…!
हम भी परिंदों की तरह उसकी एक झलक के भिखारी बन गए,
तुझे क्या मिलेगा तू ही बता, मुझे उलझनों में डालकर…!
दिल बेचैन है… और आँखें भीग सी रहती हैं।
हम में तो तुम ही हो, तुम्हारे दिल की खुदा जाने…!
हर कोई उसे नज़रअंदाज़ कर के ही चला जाता है…
खाकर ठोकर ज़माने की, फिर लौट आए मैखाने में,
क्योंकि फूलो पर कभी इत्र नही लगाया जाता…!
ये न सही करने देती है न ही कुछ गलत करने देती है।
क्या कहें जनाब… यहाँ ज़िन्दगी भी कफ़न ओढ़कर जीनी पड़ती है,
अरे इतनी नफरत है उसे मुझसे की मैं मर भी जाऊं,
दर्द तो तब हुआ… जब पता चला तीर चलाने वाले अपने ही निकले।
बोहत मुस्कील से Sad Shayari in Hindi करता हु तेरी यादों का कारोबार,
हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो,